Meri Maa

Meri Maa

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ…
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ…
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ…
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…
कभी आँख के आँसू मेरे
आँचल से पोंछा करती वो
सपनों के झूलों में अक्सर
धीरे-धीरे मुझे झुलाती
सब दुनिया से रूठ रपटकर
जब मैं बेमन से सो जाता
हौले से वो चादर खींचे
अपने सीने मुझे लगाती
दुख मेरे को समेट जाती
सुख की खुशबू बिखेर जाती
ममता की रस बरसाती जो
वो है मेरी माँ।

Himanshu Sharma
BJMC 1st Year

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