The God Of Cow

The God Of Cow

हे प्रभु मुझ गाय को ये क्यों दिया वरदान 
काश के मै बस जीव होती न होती भगवान्  

करोडो व्यंजन नहीं जीवन भर घास ही मै खाती हूँ 
इस पूरे संसार को मै अपना दूध पिलाती हूं 
मेरा दूध मेरा अपना बछड़ा न पी पाता है 
उसकी भूख से पहले वो तेरे बर्तन में जाता है 

एक माँ की तरह मेरा भी मैं तब यूँ रोता गाता है 
जब मेरा बच्चा बाद में भूखा ही सो जाता है 
तब सोचती हू काश मै कोई देवी ही ना होती 
पाठ पूजा का पात्र नहीं बस मै इसकी माँ होती
 
हे प्रभु मुझ गाय को ये क्यों दिए वरदान 
काश के मै बस जीव होती न होती भगवान 

अब लोगो की माँ नहीं मै पैसे की वस्तु दिखती हूँ 
ईश्वर की तरह मई भी बाज़ारो में बिकती हूँ 
बछड़े का हिस्सा चीन तुम खुद पेट भर लेते हो 
फिर बदले में इस  देवी को सूखी रोटी देते हो 

तेरी इस भक्ति को फिर मै कैसे भी सह जाती हूँ 
कच्चा पक्का खा लेने से ज़िंदा जो रह जाती हूँ 
कुछ लोग मेरे ह्रदय के क्रोध में गरजते है 
जब वो मुझको खा लेने में अपनी शान समझते है 

आज कुछ  भक्त मुझे गलत नज़र से देखते है 
अब तो वो मुझमे भी अपनी सियासी रोटी सकते है 

हे प्रभु मुझ गाय को ये क्यों दिए वरदान 
काश के मै बस जीव होती न होती भगवान

Samwad Bhatt
BJMC 1st Year

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