Waqt

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मे हु सबका साथी मेरा साथी कौन ! 
क्यों रह जाता हरदम तनहा ,
इतना बड़ा संसार मे ही क्यों अकेला! 

आँख भी नाम हो जाती हैं, 
मेरा दुःख बताते बताते।

न जाने लोग समझने के बजाए 
मुझे ही क्यों खत्म कर देते । 

सब कुछ तो दे देता हूँ बता, 
न जाने मुझे ही क्यों खत्म करना चाहते । 

क्यों रहता है इतनी जल्दी मे ,
खो दी ना अपनी सांसो की डोरी।।

Hemendra Singh Shekhawat
BJMC(1st Year)

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